Month: October 2018

हौसलों से उड़ान शायरी…

हौसलों से उड़ान शायरी… खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं,  धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते हैं,  हमें क्या रोकेंगे ये ज़माने वाले,  हम परों से नहीं हौसलों …

मेरी फ़ितरत में…

मेरी फ़ितरत में… भूलकर हमें अगर तुम रहते हो सलामत,  तो भूलके तुमको संभालना हमें भी आता है,  मेरी फ़ितरत में ये आदत नहीं है वरना,  तेरी तरह बदल …