सज़ा देने की तहज़ीब…

सज़ा देने की तहज़ीब…

दुशमनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी। 
मैं हाथ नहीं उठाता, नज़रों से गिरा देता हूँ।

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