हौसलों से उड़ान शायरी…

हौसलों से उड़ान शायरी… खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं,  धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते हैं,  हमें क्या रोकेंगे ये ज़माने वाले,  हम परों से नहीं हौसलों …